Sunday, November 25, 2018

धर्म सभा के दौरान अयोध्या के मुसलमानों का कैसा बीता दिन

25 नवंबर को रविवार होने के बावजूद धर्म सभा में जाने के लिए अयोध्या शहर के बाहर की तमाम सड़कों पर सुबह से ही चहल-पहल शुरू हो गई थी.

लेकिन अयोध्या शहर के भीतर का इलाक़ा किसी संवेदनशील छावनी के रूप में तब्दील हो गया था. सुबह से ही न तो किसी वाहन को अंदर जाने दिया जा रहा था और न ही अंदर से बाहर.

शिवसेना के कार्यक्रम और वीएचपी यानी विश्व हिंदू परिषद की धर्मसभा को देखते हुए मुसलमानों ने अपनी सुरक्षा को ख़तरा बताया था. उनके इस ख़ौफ़ का प्रशासन पर इतना असर हुआ कि मुख्य सड़क से लगे कुछ मुस्लिम बहुल इलाक़े पुलिस, पीएसी और आरएएफ़ की ख़ास निगरानी में रहे.

इन इलाक़ों की सुरक्षा व्यवस्था यूं तो इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी के हाथों में होती है लेकिन यहां मोर्चा ख़ुद पुलिस और पैरा मिलिट्री के आला अधिकारी सँभाले हुए थे.

अयोध्या में पुलिस बल की भारी तैनाती के बावजूद रविवार को होने वाली धर्मसभा को लेकर वहां के मुस्लिम बहुल इलाक़ों में एक भय का माहौल था.

राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद मामले के पक्षकार इक़बाल अंसारी ने ख़ुद अपने लिए डर की बात कही थी और पर्याप्त सुरक्षा नहीं मुहैया कराने की सूरत में अयोध्या छोड़ देने तक की धमकी दी थी.

इन धमकियों को देखते हुए इक़बाल अंसारी के घर पर अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था कर दी गई.

दो गनर के अलावा दो अन्य पुलिकर्मियों की तैनाती कर दी गई. न सिर्फ़ इक़बाल अंसारी बल्कि रविवार को अयोध्या के सभी मुस्लिम बहुल इलाक़ों में अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था देखी गई.

टेढ़ी बाज़ार, मुग़लपुरा, अशर्फ़ी भवन, गोला घाट इत्यादि मोहल्लों के हर प्रवेश मार्ग पर सघन घेराबंदी यानी बैरिकेडिंग की गई थी और सभी जगह पुलिस, पीएसी और आरएएफ़ के जवान तैनात थे.

इन प्रवेश मार्गों से रविवार को पूरे दिन किसी भी बाहरी व्यक्ति को न तो भीतर जाने की और न ही भीतर से बाहर आने की अनुमति दी गई. स्थानीय लोगों को भी परिचय पत्र दिखाने पर ही प्रवेश दिया गया.

फ़ैज़ाबाद के डीआईजी ओंकार सिंह का कहना था, "हमने सभी को आश्वस्त किया था कि किसी को भी डरने या किसी बहकावे में आने की ज़रूरत नहीं है. सुरक्षा देना हमारी ज़िम्मेदारी है और हम उसे निभाएंगे. लोगों ने हम पर भरोसा किया और हम भरोसे पर खरे उतरे."

टेढ़ी बाज़ार के रहने वाले जमालुद्दीन अंसारी का कहना था, "शुरू में डर तो था ही लेकिन प्रशासन ने काफ़ी मुस्तैदी दिखाई और इतनी कड़ी व्यवस्था थी कि कोई भी यहां आ नहीं सकता था. हालांकि हम लोगों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ा लेकिन जान है तो जहान है."

Wednesday, November 7, 2018

अभी तो पटाखे जले भी नहीं, पहले ही जहरीली हो गई दिल्ली की हवा

अगर दिल्ली- एनसीआर के लोगों ने पटाखे जलाने से परहेज नहीं किया तो यहां की हवा और खराब हो सकती है. बुधवार को हालात खराब रहे, हालांकि बुधवार को हवा 'बेहद गंभीर' से 'गंभीर' श्रेणी में आई. विशेषज्ञों का कहना है कि अस्थमा के मरीजों का ध्यान रखने की जरूरत है. बच्चों का भी ख्याल रखना चाहिए.

बुधवार को लोधी रोड इलाके में प्रदूषण का स्तर बेहद खराब रहा. यहां 2.5 का स्तर 228 (खराब) और पीएम 10 का स्तर 232 (खराब) दर्ज किया गया. पूरी दिल्ली में पीएम 2.5 का औसत 351 दर्ज किया गया.

मंगलवार को दिल्ली का एयर क्वॉलिटी इंडेक्स (एक्यूआई) सुबह 9 बजे 403 रहा. यह सोमवार को इसी समय 415 था, जो शाम तक 435 हो गया था. भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक, सुबह के समय हल्की धुंध रही, जिससे प्रदूषण के तत्व भी थे. मंगलवार को नमी में थोड़ी सी गिरावट आई.

प्रदूषण पर नजर रखने वाली एजेंसियों ने कहा कि पड़ोसी राज्यों से पराली जलने से प्रदूषकों में हल्की गिरावट आई है. एयर क्वॉलिटी और मौसम पूवार्नुमान और शोध (सफर) के मुताबिक, यह स्थिति दिवाली तक रहेगी. उनका कहना है कि पटाखों के प्रदूषण में अगर कमी होती है, तो इसमें सुधार होने की संभावना है.

दिल्ली के पर्यावरण मंत्री इमरान हुसैन ने मंगलवार को दिल्लीवासियों से हरित, पटाखा-मुक्त दिवाली मनाने का आग्रह किया, क्योंकि शहर की हवा की क्वॉलिटी 'बेहद खराब' है.

एक बयान में उन्होंने लोगों को दिवाली की शुभकामनाएं दीं और वायु प्रदूषण कम करने में सहयोग करने को कहा। उन्होंने कहा, "साल 2018 में दिल्ली के निवासियों और सरकारी एजेंसियों के संयुक्त प्रयासों के कारण बेहतर वायु गुणवत्ता वाले अधिक दिन देखने को मिले हैं। हालांकि, हमें दिवाली पर और उसके बाद भी अपने प्रयासों को सामूहिक रूप से जारी रखने की जरूरत है।"

उन्होंने कहा, "मैं वायु प्रदूषण में योगदान देने वाले सभी संबंधित लोगों से इसे कम करने अपील करता हूं। पटाखा-मुक्त दिवाली का जश्न एक ऐसा ही कदम है, और मुझे आशा है कि दिल्ली के निवासी अपना सकारात्मक योगदान जारी रखेंगे।"

सीएम योगी हनुमानगढ़ी में भी मत्था टेकने के बाद कनक भवन, सुग्रीव किला और अयोध्या में लगने वाली राम प्रतिमा स्थल का भी निरीक्षण किया. इसके बाद दिवाली मनाने के लिए गोरखपुर के लिए रवाना हो गए. 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को फैजाबाद का नाम अयोध्या करने की घोषणा की. ये ऐलान करते हुए सीएम योगी ने कहा कि अयोध्या हमारी 'आन, बान और शान' का प्रतीक है. इसके साथ ही राम मंदिर निर्माण की चर्चाओं के बीच उन्होंने कहा कि कोई अयोध्या के साथ अन्याय नहीं कर सकता है.

सीएम योगी ने कहा कि अयोध्या की पहचान भगवान राम से है. उन्होंने दिवाली के अवसर पर आयोजित 'दीपोत्सव' में ये बातें कहीं. उन्होंने अयोध्या में भगवान राम के नाम पर एक नया हवाई अड्डा और भगवान राम के पिता राजा दशरथ के नाम पर जिले में एक मेडिकल कॉलेज की स्थापना की भी घोषणा की. इस अवसर पर भीड़ में शामिल कुछ लोगों को 'मंदिर का निर्माण कराओ' के नारे लगाते सुना गया.

कथा पार्क में आयोजित कार्यक्रम में दक्षिण कोरिया कोरिया की प्रथम महिला किम जुंग-सुक भी शामिल हुईं. इस अवसर पर 'राम की पैड़ी' के पुन: विकास और सौंदर्यकरण और सरयु नदी में मलजल प्रवाहित करने पर रोक लगाने समेत कई परियोजनाओं का शुभारंभ किया गया.

Monday, November 5, 2018

कर्नाटक उपचुनाव में भी कांग्रेस-JDS का डंका, 4-1 से जीत, BJP को झटका

कर्नाटक में 3 लोकसभा और 2 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के नतीजे आज घोषित हो रहे हैं. यहां सत्ताधारी गठबंधन कांग्रेस-जेडीएस ने भारतीय जनता पार्टी को बड़ा झटका दिया है. बेल्लारी और जामखंडी में कांग्रेस ने जीत दर्ज की है. वहीं मांड्या लोकसभा और रामनगर में जेडीएस ने जीत दर्ज की है.

कर्नाटक के उपचुनाव में इन पांचों सीटों पर शनिवार को 67 फीसदी वोटिंग हुई थी. 31 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिसमें बीजेपी के पांच, कांग्रेस के तीन, जेडीएस के दो और 21 निर्दलीय उम्मीदवार हैं. कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन और बीजेपी के लिए उपचुनाव काफी अहम माना जा रहा है.

मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी की पत्नी अनिता कुमारस्वामी जेडीएस उम्मीदवार के तौर पर रामनगर सीट से चुनाव लड़ रही हैं. जबकि शिमोगा सीट से पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के बेटे राघवेंद्र येदियुरप्पा बीजेपी उम्मीदवार के तौर पर मैदान में हैं.  

बता दें, कर्नाटक की इन पांचों सीटों पर कुल 54.5 लाख वोटर हैं, जिनमें 27.2 लाख पुरुष और 27.3 लाख महिलाएं हैं. इनमें से करीब 36.5 लाख लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया.

समंदर में अपनी पहली पेट्रोलिंग के बाद सोमवार को एटमी हथियार से लैस पनडुब्बी आईएनएस अरिहंत स्वदेश लौट आया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अरिहंत की टीम का स्वागत किया और इस पनडुब्बी को दुश्मनों के लिए चुनौती बताया. इसके साथ ही भारतीय सेना अब जमीन, समंदर और हवा में एटमी हमले का जवाब देने की क्षमता से लैस हो गई है.

पीएम मोदी ने अरिहंत की टीम को संबोधित करते हुए कहा, 'आपका ये अभियान सुरक्षा और संरक्षा के लिए तपस्या है. अरिहंत का अर्थ है दुश्मनों को नष्ट करना. ये देश की सुरक्षा के लिए उपलब्धि है. एक बड़ा कदम है.'

प्रधानमंत्री ने आगे कहा, 'अरिहंत भारत के दुश्मनों के लिए खुली चेतावनी है कि भारत के खिलाफ कोई दुस्साहस नहीं करे. सारा भारत आपका (अरिहंत) कृतज्ञ है. आज की ये सफलता है जिसे भारत ने अपने बल बूते हासिल किया है. ' उन्होंने कहा, 'भारत एक शांतिपूर्ण देश है. ये हमारी कमजोरी नहीं है. ये हमारी शक्ति है. भारत किसी को छेड़ता नहीं है लेकिन कोई छेड़ दे तो उसे छोड़ता नहीं है.'

आईएनएस अरिहंत के सेना में शामिल होने से भारत अब तिहरे एटमी हमले का मारक जवाब दे सकता है. जमीन पर अग्नि मिसाइल, हवा में लड़ाकू विमान और जल में अरिहंत के माध्यम से भारत एटमी हमलों का जवाब आसानी से दे सकता है. पीएम मोदी ने कहा, 'आईएनएस अरिहंत के कारण न्यूक्लियर ट्रायड हासिल करते हुए भारत एलिट देशों के साथ खड़ा हो गया है.'

प्रधानमंत्री मोदी ने अरिहंत की सफल पेट्रोलिंग के लिए सभी क्रू मेंबर को बधाई दी. पीएम ने कहा कि भारत का न्यूक्लियर ट्रायड ऐतिहासिक है क्योंकि यह दुनिया में शांति और स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा. धनतेरस के मौके पर देशवासियों को इसकी सूचना देते हुए पीएम मोदी ने ट्वीट किया, 'आज धनतेरस खास बन गया है. भारत का गौरव, एटमी हथियारों से लैस आईएएन अरिहंत

ने अपना पहला पेट्रोल पूरा कर लिया है. मैं सभी क्रू मेंबर्स को बधाई देता हूं जिन्होंने यह ऐतिहासिक काम पूरा किया.'

चीन और पाकिस्तान के मद्देनजर सुरक्षा की जरूरतों पर बल देते हुए पीएम ने कहा कि आज के जमाने में एटमी निवारण वक्त ही मांग है. एटमी निवारण का तात्पर्य इससे है कि भारत ने पहले एटमी हथियार का प्रयोग न करने का फैसला किया है लेकिन वैसी स्थिति में कर सकता है जब कोई दूसरा देश उस पर हमला करे.